उत्तर- भारत जैसे पुरुष-प्रधान समाजों में स्त्रियों के साथ अनेक प्रकार का भेदभाव होता है जिसका वर्णन इस प्रकार है-
1.परिवार में लड़कों की अपेक्षा लड़कियों को कम सुविधाएँ दी जाती हैं।
2.पारिवारिक कानून अधिकांशतः पुरुषों के पक्ष में होते हैं।3.कुछ परिवारों में लड़कियों की शिक्षा पर कम ध्यान दिया जाता है।
4.अनेकों परिवारों में उन्हें बोझ समझा जाता हैं; उनके विरुद्ध उत्पीड़न के उदाहरण हम देख सकते हैं।
5.समाज में स्त्रियों की स्थिति चार-दिवारी में सिमट कर रह गयी है।
6. सार्वजनिक क्षेत्र में उनकी भूमिका निम्नतर समझी जाती है।
उत्तर- साम्प्रदायिकता धर्म का नकारात्मक रूप है। इसे राजनीतिक लक्ष्यों की प्राप्ति का साधन कहा जा सकता है। साम्प्रदायिक राजनीति के अनेक उदाहरण सामने आए हैं। राजनीतिक दल चुनावों में उम्मीदवारों को धर्म के आधार पर टिकट देते हैं। चुनाव-अभियान में धर्म का अक्सर सहारा लिया जाता है। राजतंत्र में पंथ-निरपेक्षता के जोश में धार्मिक प्रतिनिधित्व छिपे जाने के उदाहरण मिलते हैं। लोक-सेवाओं में भी साम्प्रदायिकता की भूमिका देखी जा सकती हैं।
उत्तर- भारत में जाति के अस्तित्व व उसकी भूमिका को भूलाया नहीं जा सकता। संविधान में छुआछूत के उन्मूलन के बावजूद भी तथा अनेकों कानूनों के चलते जो जाति के आधार पर भेदभाव की समाप्ति से जुड़े हैं, आज भी हमारे देश में जातिगत असमानताएँ हैं। अनुसूचित जातियों के साथ आज भी दुर्व्यवहार के अनेकों उदाहरण देखे जा सकते हैं। गरीब व उत्पीडित निम्न स्तर की जातियों के लोग आज भी राजनीतिक संरक्षण की मांग करते दिखायी पड़ते हैं। उच्चतर जाति के लोग निम्नतर जाति के लोगों के साथ सौतेला व्यवहार करते हैं।
उत्तर-(क) जाति हमारे समाज के आधारभूत तत्वों के नींव में बस चुकी हैं।
(ख) भारत जैसे देश में आज भी समाज, अर्थव्यवस्था, शासन में जाति के आधार पर निर्णय किए जाते हैं।
उत्तर- एक अनुमान के अनुसार, भारत में विधायिकाओं में महिलाओं का प्रतिनिधित्व केवल 8.3% हैं। स्थानीय स्वशासन इकाईयों में महिलाओं के लिए कुल सीटों का एक तिहाई आरक्षण अवश्य हे। राज्यों की विधानसभाओं में स्त्रियों का प्रतिनिधित्व 5% से भी कम है। लोकसभा में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को लेकर सहमति नहीं हो पायी है।
उत्तर- (क) भारत में किसी भी धर्म को राजकीय धर्म के रूप में अंगीकार नहीं किया गया है।
(ख) भारत का संविधान सभी नागरिकों और समुदायों को किसी भी धर्म का पालन करने व प्रचार करने की स्वंतत्रता देता
(क) स्त्री और पुरुष के बीच जैविक अंतर
(ख) समाज द्वारा स्त्री और पुरुष को दी गई असमान भूमिकाएं
(ग) बालक और बालिकाओं की संख्या का अनुपात।
(घ) लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में महिलाओं को मतदान का अधिकार न मिलना।
उत्तर-(ख) समाज द्वारा स्त्री और पुरुष को दी गयी असमान भमिकाएँ।
(ख) विधानसभा
(ग) मंत्रिमंडल
(घ) पंचायती राज की संस्थाएँ
उत्तर-(घ) पंचायती राज की संस्थाएँ
(अ) एक धर्म दूसरों से श्रेष्ठ हैं।
(ब) विभिन्न धर्मों के लोग समान नागरिक के रूप में खुशी-खुशी साथ रह सकते हैं।
(स) एक धर्म के अनुयायी एक समुदाय बनाते हैं।
(द) एक धार्मिक समूह का प्रभुत्व बाकी सभी धर्मों पर कायम करने में शासन की शक्ति का प्रयोग नहीं किया जा सकता।इनमें से कौन या कौन-कौन से कथन सही है?
(क) अ, ब, स और द (ख) अ, ब और द (ग) अ और स (घ) ब और द
उत्तर-(ग) अ और स।
(क) यह धर्म के आधार पर भेदभाव की मनाही करता है।
(ख) यह एक धर्म को राजकीय धर्म बताता है।
(ग) सभी लोगों को कोई भी धर्म मानने की आजादी देता है।(घ) किसी धार्मिक समुदाय में सभी नागरिकों को बराबरी का अधिकार देता है।
उत्तर- (ख) यह एक धर्म को राजकीय धर्म बताता है।
उत्तर- जाति।

उत्तर-(रे) ख, क, घ, ग सही है।