Study4all.fun

अध्याय 4- राजनीतिक दल

प्रश्न 1: लोकतंत्र में राजनीतिक दलों की विभिन्न भूमिकाओं की चर्चा करें।

उत्तर: राजनीतिक दलों की निम्न भूमिका होती है:
1.राजनीतिक दल चुनाव लड़ते हैं। अधिकांश लोकतांत्रिक देशों में चुनाव राजनीतिक दलों द्वारा खड़े किए गए उमीदवारों के बीच ही होता है।
2. राजनीतिक दल अलग-अलग नीतियों तथा कार्यक्रमों को जनता के सामने रखते हैं और मतदाता अपनी पसंद की नीतियाँ तथा कार्यक्रम चुनते हैं।
3. लोकतंत्र में राजनीतिक दल ही सरकार बनाते और चलाते हैं।
4.चुनाव हारने वाली पार्टी विपक्ष की भूमिका निभाती है।
5.राजनीतिक दल लोगों को सरकारी मशीनरी से जोड़ते हैं और लोगों तक सरकार की समाज कल्याण योजनाएँ पहुँचाते हैं।
6. राजनीतिक दल कानून निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
7. जनमत निर्माण में भी इन दलों की प्रमुख भूमिका होती है। वे मुद्दों को उठाते हैं और बहस करते हैं।

प्रश्न 2:राजनीतिक दलों के सामने क्या चुनौतियाँ हैं?

उत्तर: राजनीतिक दलों के सामने विभिन्न चुनौतियाँ निम्नलिखित हैं:
1. पार्टी के भीतर आंतरिक लोकतंत्र का अभाव। सारी दुनिया में एक प्रवृत्ति बन गई है कि सारी शक्ति एक या कुछ ही नेताओं के हाथ में सिमट जाती है।
2.वंशवाद की चुनौती। अधिकांश दल पारदर्शी तरीके से कार्य नहीं करते और बड़े नेता अपने परिवार के लोगों को ही आगे लाते हैं।
3. राजनीतिक दलों में पैसा तथा आपराधिक तत्वों की घुसपैठ का बढ़ना भी चिंताजनक है जिससे आम लोगों में राजनीतिक दलों के प्रति कोई अच्छा संदेश नहीं जाता और इससे भ्रष्ट आचरण को बढ़ावा मिलता है। यह लोकतंत्र के लिए काफी हानिकारक है।
4. पार्टियों के बीच विकल्पहीनता की स्थिति भी गंभीर चुनौती है क्योंकि इससे लोगों को चुनाव में अच्छे विकल्प नहीं मिलते। दलों के बीच वैचारिक अंतर भी काम होता जा रहा है।

प्रश्न 3:राजनीतिक दल अपना कामकाज बेहतर ढ़ंग से करें, इसके लिए उन्हें मजबूत बनाने के कुछ सुझाव दें।

उत्तर:राजनीतिक दल के बेहतर कामकाज और मजबूती के लिए कुछ सुझाव निम्नलिखित हैं:
1)राजनीतिक पार्टी के आंतरिक कामकाज को व्यवस्थित करने के लिये एक कानून बनाया जाये।
2) राजनीतिक दल एक न्यूनतम खास अनुपात (लगभग एक तिहाई) में महिला उम्मीदवारों को जरूर टिकट दें।
3)चुनाव का खर्चा सरकार वहन करे। चुनावी खर्चे का वहन करने के लिये सरकार की ओर से पार्टियों को पैसे मिलने चाहिए। कुछ खर्चे सुविधाओं के रूप में दिये जा सकते हैं; जैसे पेट्रोल, कागज, टेलिफोन, आदि।
4) दो अन्य तरीके हैं जिनसे राजनीतिक पार्टियों में सुधार किया जा सकता है। ये तरीके हैं- राजनीतिक दलों पर लोगों द्वारा दबाव बनाकर तथा सही लोगों की राजनीति में भागीदारी बढ़ाकर।

प्रश्न 4:राजनीतिक दल का क्या अर्थ होता है?

उत्तर: लोगों का एक संगठित समूह जो चुनाव लड़ने और सरकार बनाने के उद्देश्य से काम करता है, उसे राजनीतिक दल कहते हैं। समाज के सामूहिक हित को ध्यान में रखते हुए यह समूह कुछ नीतियाँ और कार्यक्रम तय करता है।

प्रश्न 5:किसी भी राजनीतिक दल के क्या गुण होते हैं?

उत्तर: राजनीतिक दल के गुण-
1.यह लोगों का एक संगठित समूह जो चुनाव लड़ने और सरकार बनाने के उद्देश्य से काम करता है।
2. प्रत्येक दल की अपनी नीतियों तथा कार्यक्रम होते हैं जिन्हें वे जनता के सामने रखते हैं।
3. राजनीतिक दल के तीन प्रमुख हिस्से होते हैं- नेता, सक्रिय सदस्य, अनुयायी या समर्थक।
4. इस प्रकार दल किसी समाज के बुनियादी राजनीतिक विभाजन को भी दर्शाते हैं।
5. कोई पार्टी समाज के एक हिस्से से संबंधित होती है और उसका नजरिया समाज के उस वर्ग/ समुदाय के प्रति झुका होता है।

प्रश्न 6:चुनाव लड़ने और सरकार में सत्ता सँभालने के लिए एकजुट हुए लोगों के समूह को ………………कहते हैं।

उत्तर: राजनीतिक दल

प्रश्न 7: पहली सूची(संगठन/दल) और दूसरी सूची(गठबंधन /मोर्चा) के नामों का मिलान करें और नीचे दिए गए कूट नामों के आधार पर सही उत्तर ढूंढें:




उत्तर: (ग)

प्रश्न 8:इनमें से कौन बहुजन समाज पार्टी के संस्थापक हैं?

(क) कांशीराम

(ख) साहू महाराज

(ग) बी. आर. अंबेडकर

(घ) ज्योतिबा फूले

उत्तर: (क) कांशीराम।

प्रश्न 9:भारतीय जनता पार्टी का मुख्य प्रेरक सिद्धांत क्या है?

(क) बहुजन समाज

(ख) क्रांतिकारी लोकतंत्र

(ग) समग्र मानवतावाद

(घ) आधुनिकता

उत्तर: (ग) समग्र मानवतावाद।

प्रश्न 10:पार्टियों के बारे में निम्नलिखित कथनों पर गौर करें:(अ) राजनीतिक दलों पर लोगों का ज्यादा भरोसा नहीं है।

(ब) दलों में अक्सर बड़े नेताओं के घोटालों की गूँज सुनाई देती है।

(स) सरकार चलाने के लिए पार्टियों का होना जरूरी नहीं।

इन कथनों में से कौन सही है?

(क) अ, ब और स (ख) अ और ब (ग) ब और स (घ) अ और स

उत्तर: (ख) अ और ब

प्रश्न 11:निम्नलिखित उद्धरण को पढ़ें और नीचे दिए गए प्रश्नों का जवाब दें:
मोहम्मद यूनुस बांग्लादेश के प्रसिद्ध अर्थशास्त्री हैं। गरीबों के आर्थिक और सामाजिक विकास के प्रयासों के लिए उन्हें अनेक अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार मिले हैं। उन्हें और उनके द्वारा स्थापित ग्रामीण बैंक को संयुक्त रूप से वर्ष 2006 का नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया। फरवरी 2007 में उन्होंने एक राजनीतिक दल बनाने और संसदीय चुनाव लड़ने का फैसला किया। उनका उद्देश्य सही नेतृत्व को उभारना, अच्छा शासन देना और नए बांग्लादेश का निर्माण करना है। उन्हें लगता है कि पारंपरिक दलों से अलग एक नए राजनीतिक दल से ही नई राजनीतिक संस्कृति पैदा हो सकती है। उनका दल निचले स्तर से लेकर ऊपर तक लोकतांत्रिक होगा।

नागरिक शक्ति नामक इस नये दल के गठन से बांग्लादेश में हलचल मच गई है। उनके फैसले को काफी लोगों ने पसंद किया तो अनेक को यह अच्छा नहीं लगा। एक सरकारी अधिकारी शाहेदुल इस्लाम ने कहा, “मुझे लगता है कि अब बांग्लादेश में अच्छे और बुरे के बीच चुनाव करना संभव हो गया है। अब एक अच्छी सरकार की उम्मीद की जा सकती है। यह सरकार न केवल भ्रष्टाचार से दूर रहेगी बल्कि भ्रष्टाचार और काले धन की समाप्ति को भी अपनी प्राथमिकता बनाएगी।“
पर दशकों से मुल्क की राजनीति में रुतबा रखने वाले पुराने दलों के नेताओं में संशय है। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के एक बड़े नेता का कहना है, “नोबेल पुरस्कार जीतने पर क्या बहस हो सकती है पर राजनीति एकदम अलग चीज है। एकदम चुनौती भरी और अक्सर विवादास्पद।“ कुछ अन्य लोगों का स्वर तो और कड़ा था। वे उनके राजनीति में आने पर सवाल उठाने लगे। एक राजनीतिक प्रेक्षक ने कहा, “देश से बाहर की ताकतें उन्हें राजनीति पर थोप रही हैं।”

क्या आपको लगता है कि यूनुस ने नई राजनीतिक पार्टी बनाकर ठीक किया?

क्या आप विभिन्न लोगों द्वारा जारी बयानों और अंदेशों से सहमत हैं? इस पार्टी को दूसरों से अलग काम करने के लिए खुद को किस तरह संगठित करना चाहिए? अगर आप इस राजनीतिक दल के संस्थापकों में एक होते तो इसके पक्ष में क्या दलील देते?

उत्तर: मेरे विचार से मोहम्मद यूनुस ने नई राजनीतिक पार्टी बनाकर सही काम किया है। जिस तरह से ग्रामीण बैंक के जरिये उन्होंने गरीबों तक बैंकिंग सेवा को पहुँचाया है उसी तरह उन्हें अच्छी राजनीति को लोगों तक पहुँचाने का पूरा हक है।
  सरकारी अधिकारी शाहेदुल इस्लाम के बयान से मैं सहमत हूँ। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के एक बड़े नेता के बयान से भी मैं सहमत हूँ लेकिन आंशिक रूप से। आज राजनीति इसलिए खराब हो गई है क्योंकि अच्छे लोग इससे दूर रहना चाहते हैं। मोहम्मद यूनुस ने राजनीति में जाने की हिम्मत दिखाई है। 
उन्हें साफ छवि वाले लोगों और बुद्धिजीवियों को अपने संगठन में लाने की कोशिश करनी चाहिए। यदि मैं इस दल के संस्थापक के रूप में होता तो भी मोहम्मद यूनुस का पूरी तरह समर्थन करता क्योंकि उन्होंने ‘नागरिक शक्ति’ दल का निर्माण समाज से भ्रष्टाचार जैसी बुराइयों को दूर करने के लिए किया है और एक अच्छी सरकार बनाने में यह दल अपनी भूमिका निभा सकता है।

You cannot copy content of this page